छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में धान खरीदी को लेकर किसानों की समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। 31 जनवरी तक टोकन स्लॉट पूरी तरह भर जाने के बावजूद आज भी सैकड़ों किसान ऐसे हैं जो अपनी उपज बेचने से वंचित हैं। महीनों की मेहनत, लागत और उम्मीदों के बाद जब किसान धान लेकर खरीदी केंद्र पहुंचते हैं, तो उन्हें यह सुनने को मिलता है कि स्लॉट समाप्त हो चुका है। इससे न केवल आर्थिक दबाव बढ़ता है, बल्कि मानसिक तनाव भी गहराता है।
धान खरीदी केंद्रों पर लंबी कतारें, सीमित तिथियां और तकनीकी प्रक्रियाएं छोटे व सीमांत किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। कई किसानों ने समय पर पंजीयन कराया, फिर भी स्लॉट न मिलने से वे परेशान हैं। मजबूरी में कुछ किसान कम दाम पर निजी व्यापारियों को धान बेचने को विवश हो रहे हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।किसानों की मांग है कि सरकार अतिरिक्त स्लॉट जारी करे, खरीदी की तिथि बढ़ाए और जमीनी स्तर पर समाधान निकाले, ताकि किसी भी किसान की फसल बिना बिके न रहे।
बलरामपुर जैसे आदिवासी और कृषि-प्रधान जिले में किसानों की आवाज सुनना और त्वरित कार्रवाई करना बेहद जरूरी है, ताकि उनका भरोसा व्यवस्था पर बना रहे।
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