Category: शिक्षा / करियर
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भारत में उच्च शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन लेने वाले छात्रों का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार अब शिक्षा ऋण की मांग केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गई है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के छात्र भी उच्च शिक्षा और बेहतर करियर के लिए एजुकेशन लोन का सहारा ले रहे हैं।
Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच Kuhoo को मिले एजुकेशन लोन आवेदनों में टियर-2 और टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी 86.5 प्रतिशत रही।
बेहतर करियर की तलाश में छात्र
छात्र ऐसे कोर्स और प्रोफेशनल प्रोग्राम को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनसे भविष्य में रोजगार और आय के बेहतर अवसर मिल सकें। MBA, जॉब-ओरिएंटेड ट्रेनिंग और दूसरे प्रोफेशनल कोर्सों के लिए भी वित्तीय सहायता की मांग बढ़ रही है।
इस बदलाव से यह संकेत मिलता है कि छोटे शहरों के विद्यार्थी भी अब राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों और करियर विकल्पों तक पहुंच बनाने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
एजुकेशन लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
एजुकेशन लोन लेने से पहले छात्र और अभिभावकों को ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, मोरेटोरियम अवधि, रीपेमेंट की शर्तें और कुल भुगतान राशि की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए।
सिर्फ लोन मिलना ही महत्वपूर्ण नहीं है। जिस कोर्स के लिए लोन लिया जा रहा है, उसकी फीस, रोजगार की संभावनाओं और संभावित शुरुआती आय का भी आकलन करना जरूरी है।
SEO Title: छोटे शहरों में बढ़ी एजुकेशन लोन की मांग, 86.5% आवेदनों का बड़ा हिस्सा
Meta Description: भारत में टियर-2 और टियर-3 शहरों के छात्रों में एजुकेशन लोन की मांग तेजी से बढ़ी है। जानिए छात्र पढ़ाई और करियर के लिए क्यों ले रहे हैं शिक्षा ऋण।